Chapter Solution
अष्टमः पाठः — अन्नाद् आनन्दं प्रति
१. एकेन पदेन रिक्तस्थानं पूरयत
| प्रश्न |
उत्तर |
| (क) ______ शरीरं वर्धते। |
अन्नेन |
| (ख) ______ शरीरं प्रतिष्ठितम्। |
प्राणेन |
| (ग) ______ विना शरीरं क्रियाशून्यं भवति। |
प्राणेन |
| (घ) ______ एव इमानि भूतानि जायन्ते। |
प्राणात् |
| (ङ) ______ समस्तानि इन्द्रियाणि सञ्चाल्यन्ते। |
मनसा |
| (च) ______ विना बोधशक्तेः तर्कशक्तेश्च विकासो न भवति। |
बुद्धितत्त्वेन |
| (छ) ______ एव सर्वकर्मणः प्रवर्तकम्। |
मनः |
२. पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखत
-
भृगोः जिज्ञासा कस्मिन् विषये आसीत्?
भृगोः जिज्ञासा ब्रह्मविषये आसीत्।
-
भृगुणा ब्रह्मज्ञानाय किम् आचरितम्?
भृगुणा ब्रह्मज्ञानाय यत्नः, अभ्यासः तथा तपः आचरितम्।
-
भृगुः प्रथमं तपसा ब्रह्मरूपेण किं ज्ञातवान्?
भृगुः प्रथमं तपसा अन्नं ब्रह्मरूपेण ज्ञातवान्।
-
मनसः के जायन्ते?
मनसः कामाः, सङ्कल्पाः, विचिकित्सा, श्रद्धा, अश्रद्धा, धृतिः, अधृतिः, ह्रीः, धीः तथा भीः जायन्ते।
-
प्राणिनः कस्मात् जायन्ते?
प्राणिनः अन्नात् जायन्ते।
-
इन्द्रियाणि केन सञ्चाल्यन्ते?
इन्द्रियाणि मनसा सञ्चाल्यन्ते।
-
शरीरं कुत्र प्रतिष्ठितम् अस्ति?
शरीरं प्राणे प्रतिष्ठितम् अस्ति।
-
केन विना स्मृतिशक्तेः विकासो न भवति?
बुद्धितत्त्वेन विना स्मृतिशक्तेः विकासो न भवति।
-
भृगुः तपसा केषां महत्त्वं ज्ञातवान्?
भृगुः तपसा अन्नस्य, प्राणस्य, मनसः, विज्ञानस्य तथा आनन्दस्य महत्त्वं ज्ञातवान्।
३. किं सत्यम्, किम् असत्यम्?
| क्रम |
वाक्यम् |
उत्तरम् |
| (क) |
प्रस्तुते पाठे पितापुत्रयोः संवादः अस्ति। |
सत्यम् |
| (ख) |
अस्मिन् संवादे अन्नस्य महत्त्वं वर्णितम्। |
सत्यम् |
| (ग) |
प्राणिनः मनसः जायन्ते इति कथनम् अस्ति। |
असत्यम् |
| (घ) |
अन्नेन शरीरं वर्धते इति। |
सत्यम् |
| (ङ) |
मनः सारथिरूपेण अस्मान् कर्मणि प्रवर्तयति। |
सत्यम् |
| (च) |
भृगुः वरुणस्य पुत्रः अस्ति। |
सत्यम् |
| (छ) |
भृगुः तपसा मनः ब्रह्मरूपेण ज्ञातवान्। |
सत्यम् |
| (ज) |
विना योगे तृतीया विभक्तिः भवति। |
सत्यम् |
४. क्रियापदेन सह समुचितं पदं योजयत
| पद |
समुचितं क्रियापदम् |
| प्राणिनः |
जायन्ते |
| शरीरम् |
वर्धते |
| तपः |
कुरुताम् |
| पितरम् |
ब्रूते |
| यत्नः |
क्रियताम् |
५. अवशिष्ट-धातुरूपाणि पूरयत
| एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| वर्तते |
वर्तेते |
वर्तन्ते |
| जायते |
जायेते |
जायन्ते |
| वर्धते |
वर्धेते |
वर्धन्ते |
६. लट्-लकार — आत्मनेपद के रूप
| धातु |
प्रथम पुरुष |
मध्यम पुरुष |
उत्तम पुरुष |
| लभ् |
लभते, लभेते, लभन्ते |
लभसे, लभेथे, लभध्वे |
लभे, लभावहे, लभामहे |
| जन् |
जायते, जायेते, जायन्ते |
जायसे, जायेथे, जायध्वे |
जाये, जायावहे, जायामहे |
| भाष् |
भाषते, भाषेते, भाषन्ते |
भाषसे, भाषेथे, भाषध्वे |
भाषे, भाषावहे, भाषामहे |
| विद् |
विद्यते, विद्येते, विद्यन्ते |
विद्यसे, विद्येथे, विद्यध्वे |
विद्ये, विद्यावहे, विद्यामहे |
| मुद् |
मोदते, मोदेते, मोदन्ते |
मोदसे, मोदेथे, मोदध्वे |
मोदे, मोदावहे, मोदामहे |
| सेव् |
सेवते, सेवेते, सेवन्ते |
सेवसे, सेवेथे, सेवध्वे |
सेवे, सेवावहे, सेवामहे |
| सह् |
सहते, सहेते, सहन्ते |
सहसे, सहेथे, सहध्वे |
सहे, सहावहे, सहामहे |
| शोभ् |
शोभते, शोभेते, शोभन्ते |
शोभसे, शोभेथे, शोभध्वे |
शोभे, शोभावहे, शोभामहे |
| यत् |
यतते, यतेते, यतन्ते |
यतसे, यतेथे, यतध्वे |
यते, यतावहे, यतामहे |
| वृध् |
वर्धते, वर्धेते, वर्धन्ते |
वर्धसे, वर्धेथे, वर्धध्वे |
वर्धे, वर्धावहे, वर्धामहे |
| मन् |
मन्यते, मन्येते, मन्यन्ते |
मन्यसे, मन्येथे, मन्यध्वे |
मन्ये, मन्यावहे, मन्यामहे |
| द्योत् |
द्योतते, द्योतेते, द्योतन्ते |
द्योतसे, द्योतेथे, द्योतध्वे |
द्योते, द्योतावहे, द्योतामहे |
| कम्प् |
कम्पते, कम्पेते, कम्पन्ते |
कम्पसे, कम्पेथे, कम्पध्वे |
कम्पे, कम्पावहे, कम्पामहे |
| याच् |
याचते, याचेते, याचन्ते |
याचसे, याचेथे, याचध्वे |
याचे, याचावहे, याचामहे |
| स्पर्ध् |
स्पर्धते, स्पर्धेते, स्पर्धन्ते |
स्पर्धसे, स्पर्धेथे, स्पर्धध्वे |
स्पर्धे, स्पर्धावहे, स्पर्धामहे |
| लज्ज् |
लज्जते, लज्जेते, लज्जन्ते |
लज्जसे, लज्जेथे, लज्जध्वे |
लज्जे, लज्जावहे, लज्जामहे |
| क्षी |
क्षीयते, क्षीयेते, क्षीयन्ते |
क्षीयसे, क्षीयेथे, क्षीयध्वे |
क्षीये, क्षीयावहे, क्षीयामहे |
७. लोट्-लकार — वन्द् तथा कृ धातु
वन्द्-धातु
| पुरुष |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथम |
वन्दताम् |
वन्देताम् |
वन्दन्ताम् |
| मध्यम |
वन्दस्व |
वन्देथाम् |
वन्दध्वम् |
| उत्तम |
वन्दै |
वन्दावहै |
वन्दामहै |
कृ-धातु
| पुरुष |
एकवचनम् |
द्विवचनम् |
बहुवचनम् |
| प्रथम |
कुरुताम् |
कुर्वाताम् |
कुर्वताम् |
| मध्यम |
कुरुष्व |
कुर्वाथाम् |
कुरुध्वम् |
| उत्तम |
करवै |
करवावहै |
करवामहै |
८. लोट्-लकार में क्रियापदों के रूप
| क्रियापद |
प्रथम पुरुष |
मध्यम पुरुष |
उत्तम पुरुष |
| लभ् |
लभताम्, लभेताम्, लभन्ताम् |
लभस्व, लभेथाम्, लभध्वम् |
लभै, लभावहै, लभामहै |
| सेव् |
सेवताम्, सेवेताम्, सेवन्ताम् |
सेवस्व, सेवेथाम्, सेवध्वम् |
सेवै, सेवावहै, सेवामहै |
| जय् |
जयताम्, जयेताम्, जयन्ताम् |
जयस्व, जयेताम्, जयध्वम् |
जये, जयावहै, जयामहै |
| भाष् |
भाषताम्, भाषेताम्, भाषन्ताम् |
भाषस्व, भाषेथाम्, भाषध्वम् |
भाषे, भाषावहै, भाषामहै |
| विद् |
विद्यताम्, विद्येताम्, विद्यन्ताम् |
विद्यस्व, विद्येथाम्, विद्यध्वम् |
विद्ये, विद्यावहै, विद्यामहै |
| सह् |
सहताम्, सहेताम्, सहन्ताम् |
सहस्व, सहेथाम्, सहध्वम् |
सहे, सहावहै, सहामहै |
| यत् |
यतताम्, यतेताम्, यतन्ताम् |
यतस्व, यतेथाम्, यतध्वम् |
यते, यतावहै, यतामहै |
| याच् |
याचताम्, याचेताम्, याचन्ताम् |
याचस्व, याचेथाम्, याचध्वम् |
याचे, याचावहै, याचामहै |
| स्पर्ध् |
स्पर्धताम्, स्पर्धेताम्, स्पर्धन्ताम् |
स्पर्धस्व, स्पर्धेथाम्, स्पर्धध्वम् |
स्पर्धे, स्पर्धावहै, स्पर्धामहै |
| लज्ज् |
लज्जताम्, लज्जेताम्, लज्जन्ताम् |
लज्जस्व, लज्जेथाम्, लज्जध्वम् |
लज्जे, लज्जावहै, लज्जामहै |
| कृ |
कुरुताम्, कुर्वाताम्, कुर्वताम् |
कुरुष्व, कुर्वाथाम्, कुरुध्वम् |
करवै, करवावहै, करवामहै |