Chapter Solution
नवमः पाठःकृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
१. अधः प्रदत्तप्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखत —
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भीमस्य जननी का?
उत्तरम् — कुन्ती।
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कुन्त्या निश्चितं कः न समर्थयति?
उत्तरम् — युधिष्ठिरः।
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पाण्डवानाम् उपकर्ता कः?
उत्तरम् — ब्राह्मणः।
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कं चिन्तयन् दुर्योधनः निद्रां न लभते?
उत्तरम् — भीमम्।
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पाण्डवाः कुत्र निवसन्ति स्म?
उत्तरम् — एकचक्रनगरे।
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भरतवंशप्रदीपः कः?
उत्तरम् — भीमः।
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कः भृशं परिदेवयते?
उत्तरम् — ब्राह्मणः।
२. पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखत —
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“भैक्षप्रदानेन........” इति श्लोकानुसारं सनातनः धर्मः कः?
उत्तरम् —
चिरं वयं परैः भैक्षप्रदानेन उपकृताः।
कृतं प्रतिकृतं भूयात्, एषः सनातनः धर्मः।
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बकनामा दैत्यः कुत्र वसति?
उत्तरम् —
बकनामा दैत्यः एकचक्रस्य पुरस्यादूरवर्तिनि पर्वते वसति।
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कुन्ती किं प्रतिश्रुतवती?
उत्तरम् —
कुन्ती स्वपुत्रेषु एकं बकासुरस्य समीपं प्रेषयामि इति प्रतिश्रुतवती।
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भीमस्य अग्रजः कः?
उत्तरम् —
भीमस्य अग्रजः युधिष्ठिरः अस्ति।
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का प्रत्यादेशं न अर्हति?
उत्तरम् —
मातुः आज्ञा प्रत्यादेशं न अर्हति।
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पौराः बकासुराय कथं बलिम् आहरन्ति?
उत्तरम् —
पौराः बकासुराय पर्यायक्रमेण बलिम् आहरन्ति।
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क्षत्रियाणां धर्मः कः?
उत्तरम् —
नररक्षणं नाम भूमिपालानां क्षत्रियाणां धर्मः।
३. अधस्तात् दत्तानि वाक्यानि केन कं प्रति उक्तानि इति निर्दिशत —
| क्र.सं. |
वाक्यम् |
केन / कया |
कं / कां प्रति |
| यथा |
तस्माद् बालकस्य पिता तपस्वी शोचति। |
कुन्त्या |
भीमम् |
| १ |
न हि मातुराज्ञा प्रत्यादेशमर्हति। |
भीमेन |
युधिष्ठिरम् |
| २ |
न हि खरदंष्ट्रो मृगाधिपः सहायमपेक्षते। |
भीमेन |
अर्जुनम् |
| ३ |
क्षत्रियाण्या यदुचितं तदनुष्ठितम्। |
भीमेन |
युधिष्ठिरम् |
| ४ |
अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे? |
सहदेवेन |
भीमम् |
| ५ |
तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्? |
युधिष्ठिरेण |
कुन्तीम् |
| ६ |
नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः। |
बकेन |
भीमम् |
४. रेखाङ्कितपदेषु सन्धिं विभज्य सन्धिनाम लिखत —
| क्र.सं. |
सन्धिपदम् |
सन्धिविच्छेदः |
सन्धिनाम |
| यथा |
चैतावत् |
च + एतावत् |
वृद्धि-सन्धिः |
| क |
सम्यगनुष्ठितम् |
सम्यक् + अनुष्ठितम् |
जश्त्व-सन्धिः |
| ख |
पुरस्यादूरवर्तिनि |
पुरस्य + अदूरवर्तिनि |
दीर्घ-सन्धिः |
| ग |
दुरात्मनो वृत्तम् |
दुरात्मनः + वृत्तम् |
विसर्ग-सन्धिः |
| घ |
मानुषोऽपि |
मानुषः + अपि |
विसर्ग-सन्धिः |
| ङ |
नास्त्यत्र |
नास्ति + अत्र |
यण्-सन्धिः |
| च |
यदुचितम् |
यत् + उचितम् |
जश्त्व-सन्धिः |
| छ |
पुत्रस्तपस्वी |
पुत्रः + तपस्वी |
विसर्ग-सन्धिः |
| ज |
सङ्कल्पितम् |
सम् + कल्पितम् |
अनुस्वार-सन्धिः |
| झ |
धर्मसङ्ग्रहोऽत्र |
धर्मसङ्ग्रहः + अत्र |
विसर्ग-सन्धिः |
| ञ |
स राक्षसः |
सः + राक्षसः |
विसर्ग-सन्धिः |
५. पर्यायवाचि-पदानां मेलनं कुरुत —
| पदम् |
पर्यायवाची पदम् |
| आयोधनम् |
युद्धम् |
| विप्रः |
ब्राह्मणः |
| असुरः |
दैत्यः |
| अम्ब |
जननी |
| हुताशनः |
अग्निः |
उत्तरक्रमः — (क)–५, (ख)–१, (ग)–४, (घ)–२, (ङ)–३
६. अधोलिखितानां पदानां विपरीतार्थक-शब्दान् लिखत —
| पदम् |
विपरीतार्थक-पदम् |
| यथा — पीवरः |
कृशः |
| उपकृतः |
अपकृतः |
| अग्रजस्य |
अनुजस्य |
| उचितम् |
अनुचितम् |
| हर्षः |
शोकः |
७. मञ्जूषातः समुचितं विशेषणपदं चित्वा लिखत —
मञ्जूषा —
क्षत्रियाणी, शकटपूरम्, प्रतिवेशी, खरदंष्ट्रः,
जठरस्थः, कौन्तेयः, पीवरौ
| विशेष्यपदम् |
उचितं विशेषणपदम् |
| यथा — बाहू |
पीवरौ |
| मृष्टान्नम् |
शकटपूरम् |
| ब्राह्मणः |
प्रतिवेशी |
| मृगाधिपः |
खरदंष्ट्रः |
| भीमः |
कौन्तेयः |
| कुन्ती |
क्षत्रियाणी |
| हुताशनः |
जठरस्थः |
८. समस्तपदानि लिखत —
| क्र.सं. |
विग्रह-वाक्यम् |
समस्तपदम् |
| यथा |
मृष्टम् अन्नम् |
मृष्टान्नम् |
| क |
वीरस्य भुजयोः बलम् |
भुजबलम् |
| ख |
धर्माणां सङ्ग्रहः |
धर्मसङ्ग्रहः |
| ग |
मातुः आज्ञा |
मातुराज्ञा |
| घ |
धनुः धरति इति |
धनुर्धरः |
| ङ |
मृगाणाम् अधिपः |
मृगाधिपः |
| च |
न दूरे वर्तते |
अदूरवर्ती |
९. अधोलिखितवाक्यानाम् उचितभावैः सह सम्मेलनं कुरुत —
| क्र.सं. |
वाक्यम् |
उचितभावः |
| यथा |
प्रभूतमुपस्थितं मे भोजनम्। |
हर्षः |
| क |
धनुर्धरोऽहमनुगमिष्यामि। |
ओजः |
| ख |
भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्? |
निराशा |
| ग |
अपि हस्तद्वयेन भोक्ष्यसे? |
हासः |
| घ |
हनिष्यामि तं दुरात्मानम्। |
धैर्यम् |
| ङ |
स खल्वेकपुत्रस्तपस्वी भृशं परिदेवयते। |
ग्लानिः |
| च |
मानुषापसद, परिवेषय मे भोजनम्। |
अधिकारः |
उत्तरक्रमः — (क)–५, (ख)–२, (ग)–१, (घ)–६, (ङ)–३, (च)–४
१०. वाच्यपरिवर्तनं कुरुत —
| कर्तृवाच्यम् |
कर्मवाच्यम् / परिवर्तित रूपम् |
| यथा — भवत्या प्रतिश्रुतम्। |
भवती प्रतिश्रुतवती। |
| क) क्षत्रियाण्या अनुष्ठितम्। |
क्षत्रियाणी अनुष्ठितवती। |
| ख) भवत्या सज्जीक्रियताम्। |
भवती सज्जीकरोतु। |
| ग) भवत्या उपक्षिप्तम्। |
भवती उपक्षिप्तवती। |
| घ) त्वया सङ्कल्पितम्। |
त्वं सङ्कल्पितवान्। |
| ङ) भवता धर्मसङ्ग्रहः द्रष्टव्यः। |
भवान् धर्मसङ्ग्रहं पश्यतु। |
| च) पौरजनैः मानुषः प्रेषयितव्यः। |
पौरजनाः मानुषं प्रेषयन्तु। |
अभ्यासस्य संक्षिप्त पुनरावृत्तिः
| व्याकरण-विषयः |
मुख्य उदाहरणम् |
| जश्त्व-सन्धिः |
सम्यक् + अनुष्ठितम् → सम्यगनुष्ठितम् |
| दीर्घ-सन्धिः |
पुरस्य + अदूरवर्तिनि → पुरस्यादूरवर्तिनि |
| विसर्ग-सन्धिः |
दुरात्मनः + वृत्तम् → दुरात्मनो वृत्तम् |
| यण्-सन्धिः |
नास्ति + अत्र → नास्त्यत्र |
| अनुस्वार-सन्धिः |
सम् + कल्पितम् → सङ्कल्पितम् |
| समासः |
धर्माणां सङ्ग्रहः → धर्मसङ्ग्रहः |
| वाच्यपरिवर्तनम् |
भवत्या प्रतिश्रुतम् → भवती प्रतिश्रुतवती |
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